छत्तीसगढ़

बस्तर में पीलिया से बढ़ी चिंता, अस्पतालों से ज्यादा झाड़-फूंक पर भरोसा कर रहे लोग

जगदलपुर: बस्तर में स्वास्थ्य विभाग लगातार इलाज और जागरूकता अभियान चलाने के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। यहां लोग आज भी अस्पतालों की बजाय झाड़-फूंक और देसी इलाज पर ज्यादा भरोसा करते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि सरकारी अस्पतालों में पीलिया के बहुत कम मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि शहर से लगे आड़ावाल क्षेत्र में देसी उपचार के लिए लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं।

अस्पतालों में कम, देसी इलाज केंद्रों में ज्यादा भीड़

जगदलपुर के महारानी जिला अस्पताल में रोजाना सिर्फ एक या दो पीलिया मरीज ही इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीजों को बेहतर इलाज और उनके आसपास रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

डॉक्टरों के अनुसार दूषित पानी पीलिया फैलने की सबसे बड़ी वजह बन रहा है। इसी को देखते हुए नगर निगम के साथ मिलकर संक्रमित जल स्रोतों की पहचान करने का काम किया जा रहा है।

दूषित पानी बना बीमारी की बड़ी वजह

नगर निगम ने भी स्वीकार किया है कि शहर के कई इलाकों से दूषित पानी की शिकायतें मिली हैं। कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन नालियों के बीच से गुजर रही है, जिससे पानी संक्रमित हो रहा है।

दलपत सागर समेत कुछ इलाकों में टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि प्रभावित क्षेत्रों में सुधार कार्य जारी है, लेकिन इसके बावजूद लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था पर कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

झाड़-फूंक के भरोसे बढ़ रहा खतरा

स्वास्थ्य विभाग खुद मान रहा है कि कई मरीज पहले झाड़-फूंक और देसी उपचार के चक्कर में समय गंवा देते हैं। जब हालत ज्यादा बिगड़ जाती है, तब वे अस्पताल पहुंचते हैं। इससे बीमारी गंभीर हो जाती है और मौत का खतरा भी बढ़ जाता है।

यही वजह है कि अब स्वास्थ्य विभाग लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचने की लगातार अपील कर रहा है।

सिविल सर्जन ने लोगों से की अपील

सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद ने बताया कि गर्मी के मौसम में पानी से फैलने वाली बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। उन्होंने कहा कि अभी जिला अस्पताल में पीलिया के कुछ मरीज सामने आए हैं और लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कई लोग झाड़-फूंक के भरोसे इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति में पीलिया के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

अंधविश्वास बनाम स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल

बस्तर में सामने आ रही यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। सवाल यह है कि आखिर लोगों का भरोसा सरकारी अस्पतालों से क्यों कमजोर हो रहा है और क्यों आज भी कई लोग वैज्ञानिक इलाज की जगह अंधविश्वास और देसी उपचार को प्राथमिकता दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों का भरोसा जीतना भी स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

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