हिस्ट्रीशीटर के जिलाबदर मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, छत्तीसगढ़ सरकार को जारी किया नोटिस

छत्तीसगढ़ : रायगढ़ निवासी हिस्ट्रीशीटर विजय कुमार राजपूत उर्फ विज्जू के जिलाबदर आदेश को चुनौती देने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिका दाखिल करने में हुई देरी को स्वीकार किया और राज्य सरकार को 15 जुलाई 2026 तक अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को राज्य शासन के स्थायी अधिवक्ता को दस्ती नोटिस तामील कराने की अनुमति भी प्रदान की गई।
जस्टिस विश्वनाथन और जस्टिस अराधे की पीठ में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ में हुई। अदालत ने फिलहाल मामले पर राज्य सरकार का पक्ष जानने के लिए नोटिस जारी किया है।
हाई कोर्ट ने याचिका की थी खारिज
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 22 जनवरी 2026 को विजय कुमार राजपूत की रिट याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 9 के तहत जिलाबदर आदेश के खिलाफ अपील का प्रभावी वैधानिक प्रावधान मौजूद है। इसलिए सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता।
वैधानिक अपील का रास्ता अपनाने की दी थी सलाह
तत्कालीन सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया था कि जब कानून में अपील का वैकल्पिक और प्रभावी उपाय उपलब्ध है, तब पहले उसी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। इसी आधार पर याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को वैधानिक अपील दायर करने की स्वतंत्रता दी गई थी।
बिना सुनवाई जिलाबदर करने का लगाया आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया था कि 4 नवंबर 2025 को जिला दंडाधिकारी ने बिना नोटिस जारी किए और बिना पक्ष रखने का अवसर दिए उसके खिलाफ जिलाबदर का आदेश पारित कर दिया। याचिका में यह भी कहा गया कि उस समय वह पहले से जेल में बंद था, इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर जिलाबदर आदेश को निरस्त करने की मांग की गई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट में आगे बढ़ेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब राज्य सरकार अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखेगी। इसके बाद शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि मामले में आगे किस प्रकार की कानूनी कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल इस प्रकरण पर सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है।




