हरेली की खुशियां और तिरंगे का सम्मान, आज छत्तीसगढ़ में होंगे कई बड़े आयोजन, सीएम साय और भूपेश बघेल रहेंगे शामिल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बुधवार का दिन लोक संस्कृति और राष्ट्रभक्ति, दोनों के लिए खास रहने वाला है। प्रदेशभर में जहां हरेली तिहार पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा, वहीं बस्तर में तीन दिवसीय ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ का शुभारंभ भी होगा। राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अलग-अलग कार्यक्रमों में हरेली पर्व की खुशियां साझा करेंगे।
मुख्यमंत्री निवास में सजेगा हरेली तिहार का रंग
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज नया रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित हरेली तिहार कार्यक्रम में शामिल होंगे। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलने वाले इस आयोजन में कृषि संस्कृति, पारंपरिक खेल, लोक परंपराओं और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री कृषि उपकरणों की पूजा सहित विभिन्न पारंपरिक गतिविधियों में भाग लेंगे।
शाम को ‘आजादी की धुन’ कार्यक्रम में होंगे शामिल
हरेली कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री शाम 7 बजे से 8:30 बजे तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘आजादी की धुन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के समापन के बाद वह मुख्यमंत्री निवास लौटेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास पर भी होगा हरेली उत्सव
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अपने रायपुर स्थित निवास पर हरेली तिहार का आयोजन करेंगे। सुबह 11:30 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और हरेली से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
बस्तर में आज से शुरू होगी तीन दिवसीय तिरंगा यात्रा
प्रदेश के बस्तर संभाग में आज से तीन दिन तक चलने वाली ‘बस्तर तिरंगा यात्रा’ की शुरुआत होगी। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा इस यात्रा का नेतृत्व करेंगे। यात्रा 12 से 14 अगस्त तक नारायणपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी तक पहुंचेगी। इसका उद्देश्य पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और देशभक्ति का संदेश पहुंचाना है।
आज पूरे प्रदेश में दिखेगा संस्कृति और राष्ट्रभावना का उत्सव
एक तरफ हरेली तिहार के माध्यम से किसान, खेती और छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं का सम्मान किया जाएगा, तो दूसरी ओर तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति समर्पण का संदेश दिया जाएगा। इस तरह आज का दिन छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रभावना के अनूठे संगम का साक्षी बनेगा।




